ज़िंदगी..

ज़िन्दगी की कश्मकश देखो..,

लोग भूल जाते है जीना!!

जिसके लिए जीते है;

वही रह जाता है अधूरा!!

ज़िन्दगी एक होड़ है..

शामिल होना जोर है!!

ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा,

इसलिए चिंता न करना एक बारा…,

जब तक तुम सही, झुकने की ज़रूरत नही;

जिस दिन गलती कर दो, पश्चाताप से मुकरना नही!!

यहाँ लोग तुम्हारी अच्छाई नही, गलती का इंतज़ार करते है.,

निन्यान्वे सही, एक गलत.., सबसे पहले ऊँगली उठाते हैं।

यहाँ कोई अपना नहीँ, फिर भी सब अपने हैं!!

लोग अच्छाई का बुर्खा तो कई सदियों से पहने है…

थाम लो कदमों को, पर मर मर के जीना नहीं,

भीड़ से पीछे हटना, कभी बहुत अच्छा होता है,

एक बार रुक कर पीछे मुड़ना भी ज़रूरी होता है!!!

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